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5 चीँजे जो हम प्रकृति से सीख सकते है

 

5 चीँजे जो हम प्रकृति से सीख सकते है

 

शिक्षक का महत्व निबंध - Essay On Teacher In Hindi - Hindi7Facts Friends  आप सबको प्रकृति  और मनुष्य का क्या relation है ये तो पता ही होगा । पर मै आज आपसे मनुष्य और प्रकृति  के एक अलग ही relationship के बारे मे बात करूँगा। और वो रिलेशन है Teacher और  Student का । जी हाँ , प्रकृति  ही हमारी सबसे बड़ी Teacher है। ये हमे हर पल कुछ न कुछ सीखाती रहती है बस जरूरत है तो थोड़ा ध्यान देने का । आज तक मनुष्य ने जो कुछ भी हासिल किया है वो प्रकृति  से सीख लेकर ही किया है। न्यूटन को gravity का पाठ प्रकृति  ने ही सीखाया है। कई अविष्कार भी प्रकृति  से प्रेरित है। इन सबके अलावा प्रकृति  हमे ऐसे गुण भी सीखाती है जिससे हम अपने जीवन मे सकारात्मक परिवर्तन ला सकते है और इसे बेहतर बना सकते हैँ।

 

1) पतझड़ का मतलब पेड़ का अंत नही :

 

 

 

जिस प्रकार पतझड़ के बिना पेड़ पर | Smsday.in

कभी-कभी हमारे साथ कुछ ऐसा घटित हो जाता है जिससे हम बहुत low महसूस करते है। ऐसा लगता है जैसे अब सब कुछ खत्म हो गया इससे कई लोग  depression मे चले जाते है तो कई लोग बड़ा और बेवकूफी भरा कदम उठा लेते है जैसे आत्महत्या पर जरा सोचिये पतझड़ के समय जब पेड़ मे ऐक भी पत्ती नही बचती है तो क्या उस पेड़ का अंत हो जाता है? नही। वो पेड़ हार नही मानता नए जीवन और बहार के आश मे खड़ा रहता है। और जल्द ही उसमे नयी पत्तियाँ आनी शुरू हो जाती है, उसके जीवन मे फिर से बहार आ जाती  है। यही प्रकृति  का नियम है। ठीक ऐसे ही अगर हमारे जीवन मे कुछ ऐसे destructive पल आते है तो इसका मतलब अंत नही बल्की ये इस बात का इशारा है कि हमारे जीवन मे भी नयी बहार आयगी। अत: हमे सबकुछ भूलकर नयी जिन्दगी की शुरूआत करनी चाहिये। और ये विश्वास रखना चाहिए कि नयी जिन्दगी पुरानी से कही बेहतर होगी।

 

2) नदी का बहाव ऊँचाई से नीचे की ओर होता है :  

 

 

Ganges river india | गंगा नदी नहीं थी तब कौनसी नदी भारत में बहती थी? 

 जिस तरह से नदी मे पानी का बहाव ऊँचे level से नीचे  level की ओर ही होता है उसी तरह हमारी जिन्दगी मे भी प्रेम भाव का प्रवाह बड़े से छोटे की ओर होता है इसलिये हमे कभी भी अपने आप को दूसरो के सामने ज्ञानवान या बड़ा बताने की जरूरत नही है और इससे कोई फायदा भी तो नही है उल्टा प्रेम भाव हम तक बहकर नही आयेगा।

 

3) कमल किचड़ मे भी रहकर अपना अलग पहचान बनाता है :


हर कमल को कीचड़ से, उभर कर आना होता है। तोड़ परिवे | Nojoto...

 ये मेरी  favorite line है। यही बात मुझे बुराई के बीच रहकर भी अच्छा करने के लिये प्ररित करती है। जिस तरह कमल कीचड़ मे रहकर  भी अपने अंदर कीचड़ वाले गुण विकसित नही होने देता है उसी तरह चाहे हमारे आस-पास कितनी ही बुराईयाँ हो पर उसे अपने अंदर पनपने नही देना चाहिये। हमे अपना अलग पहचान बनाना चाहिये।

 

माना कठिनाई आने से आदमी
अकेला हो जाता है।
लेकिन कठिनाई आने पर ही अकेला व्यक्ति
मजबूत होना सीख जाता है।

 

 

 

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